Category: प्रेरणा

मन में नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता जगाने वाले विचार।”

  • आत्म-सुधार: खुद का बेहतर संस्करण बनने की यात्रा

    क्या आप कभी ऐसा महसूस करते हैं कि आप अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुँच पाए हैं? क्या आप जीवन में अधिक संतुष्टि, सफलता और खुशी चाहते हैं? यदि हाँ, तो आत्म-सुधार की यात्रा आपके लिए ही है।आत्म-सुधार कोई मंजिल नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह खुद को बेहतर बनाने, नई चीजें सीखने और अपनी कमजोरियों को ताकत में बदलने का एक सचेत प्रयास है।यहाँ कुछ बेहतरीन रणनीतियाँ दी गई हैं जो आपको इस यात्रा में मदद कर सकती हैं:

    1. छोटे, प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित करेंबदलाव की शुरुआत हमेशा छोटे कदमों से होती है। “मुझे फिट होना है” जैसा बड़ा लक्ष्य रखने के बजाय, “मैं हर दिन 15 मिनट टहलूँगा” जैसा छोटा और विशिष्ट लक्ष्य रखें। जब आप इन छोटे लक्ष्यों को पूरा करते हैं, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आप बड़े लक्ष्यों के लिए प्रेरित होते हैं।

    2. पढ़ने की आदत डालेंकिताबें ज्ञान का असीमित भंडार हैं। हर दिन सिर्फ 20-30 मिनट पढ़ने से भी आपके दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव आ सकता है। फिक्शन, नॉन-फिक्शन, आत्मकथाएँ, या कौशल-आधारित किताबें पढ़ें। पढ़ना आपके दिमाग को तेज करता है, आपकी एकाग्रता को बढ़ाता है और आपको नए विचार देता है।

    3. एक नई आदत अपनाएं (और पुरानी को बदलें)हमारी आदतें ही हमारा भविष्य तय करती हैं। कोई एक सकारात्मक आदत चुनें, जैसे सुबह जल्दी उठना, ध्यान (meditation) करना, या स्वस्थ भोजन करना, और इसे लगातार 21 से 30 दिनों तक करने का प्रयास करें। धीरे-धीरे यह आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाएगी।

    4. अपनी मानसिकता पर काम करेंसफलता की शुरुआत आपकी सोच से होती है। ‘फिक्स्ड माइंडसेट’ (Fixed Mindset) के बजाय ‘ग्रोथ माइंडसेट’ (Growth Mindset) अपनाएं। इसका मतलब है यह मानना कि आप मेहनत और समर्पण से अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकते हैं। चुनौतियों को सीखने के अवसर के रूप में देखें, न कि बाधाओं के रूप में।

    5. अपने शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखेंआपका शरीर आपका सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है।संतुलित आहार: पौष्टिक भोजन करें।नियमित व्यायाम: शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।पूरी नींद: हर रात 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें।जब आप शारीरिक रूप से अच्छा महसूस करते हैं, तो आप मानसिक रूप से भी मजबूत होते हैं।

    6. अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलेंविकास हमेशा आराम के दायरे से बाहर होता है। कुछ ऐसा करें जिससे आपको थोड़ी घबराहट होती हो – चाहे वह सार्वजनिक रूप से बोलना हो, कोई नया कौशल सीखना हो, या अकेले यात्रा करना हो। यह आपके आत्मविश्वास को बढ़ाने का सबसे तेज़ तरीका है।

    7. आभार (Gratitude) का अभ्यास करेंहर दिन उन तीन चीजों को लिखें जिनके लिए आप आभारी हैं। यह अभ्यास आपके ध्यान को कमी से हटाकर आपके पास जो कुछ है उस पर केंद्रित करता है। यह आपकी मानसिकता को सकारात्मक बनाता है और तनाव कम करता है।

    8. धैर्य रखेंआत्म-सुधार एक रात में नहीं होता। इसमें समय, धैर्य और निरंतरता लगती है। रास्ते में असफलताएँ आएंगी, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि आप हार न मानें और सीखते रहें।

    निष्कर्ष

    खुद का बेहतर संस्करण बनना आपके जीवन का सबसे फायदेमंद निवेश हो सकता है। आज ही एक छोटा कदम उठाएं, और याद रखें कि हर प्रयास मायने रखता है।

    https://youtube.com/@prernapathofficial-x8j?si=2u8N5NSl285MrbcD

    https://twitter.com/prernapath?t=AWYtphEdNe5KdjYs59B9Rg&s=09

  • सकारात्मक ऊर्जा जो आपके जीवन बदलदे

    सकारात्मक ऊर्जा जो आपके जीवन बदलदे

    “सफलता का कोई रहस्य नहीं है, यह तैयारी, कड़ी मेहनत और असफलता से सीखने का परिणाम है।”

    आपका समय सीमित है, इसे किसी और की ज़िंदगी जीकर बर्बाद न करें।

    “”सपने वो नहीं हैं जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने नहीं देते।”– डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम”

    उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।”– स्वामी विवेकानंद”

    कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है।””

    असफलता ही सफलता की सीढ़ी है।

    हर असफलता हमें कुछ नया सिखाती है।”

    “खुद पर विश्वास रखो। आपकी क्षमता आपकी सोच से कहीं ज़्यादा है।””

    जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं की, उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की।”– अल्बर्ट आइंस्टीन”

    आपका भविष्य उससे बनता है जो आप आज करते हैं, उससे नहीं जो आप कल करने की सोचते हैं।””

    छोटी-छोटी आदतें ही बड़ा बदलाव लाती हैं।”

    “जो हो गया उसे सोचा नहीं करते, जो मिल गया उसे खोया नहीं करते। हासिल उन्हें होती है सफलता, जो वक़्त और हालात पर रोया नहीं करते।””

    ज़िंदगी में मुश्किलें आना ज़रूरी हैं, क्योंकि इन्हीं से हमें अपनी ताक़त का पता चलता है।””मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।””

    हर छोटा बदलाव एक बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है।””

    इंतज़ार करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं।”– डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम”

    आपका सबसे बड़ा शिक्षक आपकी अपनी आखिरी गलती है।””

    जीत और हार आपकी सोच पर निर्भर करती है, मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जीत होगी।””

    वह व्यक्ति बनें जो आप बनना चाहते हैं, न कि वह जो दूसरे देखना चाहते हैं।””

    अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो।”– डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम”

    साहस का मतलब डर का न होना नहीं है, बल्कि डर पर विजय पाना है।”

    https://youtube.com/@prernapathofficial-x8j?si=beKTsV474cfPEL-8

  • जब आप प्रेरित महसूस न करें तब क्या करें?

    जब आप प्रेरित महसूस न करें तब क्या करें?

    हम सभी की ज़िंदगी में ऐसे दिन आते हैं जब बिस्तर से उठने का मन नहीं करता, काम करने की हिम्मत नहीं होती या अपने लक्ष्यों की तरफ एक कदम भी बढ़ाना भारी लगता है। प्रेरणा की कमी (lack of motivation) महसूस होना बहुत आम है। हम सब “प्रेरित” (motivated) महसूस करना चाहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि प्रेरणा एक अहसास है जो आता-जाता रहता है।

    तो, उन दिनों में क्या करें जब प्रेरणा बिल्कुल न हो?यहाँ 5 आसान तरीके दिए गए हैं जो आपको उस ‘रुके हुए’ अहसास से बाहर निकलने में मदद कर सकते हैं:

    1. इसे स्वीकार करें, खुद को दोषी न ठहराएँसबसे पहली बात, प्रेरित महसूस न करने के लिए खुद को दोषी (guilty) महसूस न कराएँ। यह बिल्कुल सामान्य है। आप कोई मशीन नहीं हैं। कभी-कभी हमारा दिमाग और शरीर हमें संकेत दे रहे होते हैं कि उन्हें एक छोटे से ब्रेक की ज़रूरत है। इस अहसास से लड़ें नहीं, बस इसे स्वीकार करें।

    2. “5-मिनट का नियम” अपनाएँअक्सर सबसे मुश्किल काम होता है किसी काम को “शुरू करना”। अपने आपसे कहें कि आप उस काम को (चाहे वह ब्लॉग लिखना हो, पढ़ना हो, या व्यायाम करना हो) सिर्फ 5 मिनट के लिए करेंगे।ज़्यादातर समय, 5 मिनट पूरे होने के बाद आप उस काम को जारी रखने के लिए खुद ही प्रेरित महसूस करने लगते हैं। और अगर नहीं भी करते हैं, तो कम से कम आपने 5 मिनट के लिए कोशिश की!

    3. अपना माहौल बदलेंएक ही जगह पर फंसे रहने से दिमागी तौर पर भी फंसा हुआ महसूस होता है। अगर आप अपने डेस्क पर बैठकर प्रेरित महसूस नहीं कर रहे हैं, तो उठ जाएँ।टहलने के लिए बाहर जाएँ।किसी दूसरे कमरे में जाकर काम करने की कोशिश करें।सिर्फ अपनी मेज को साफ़ करना भी कभी-कभी नई ऊर्जा दे सकता है।माहौल में एक छोटा सा बदलाव आपके सोचने के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकता है।

    4. याद करें कि आपने शुरू क्यों किया था? (आपका ‘Why’)प्रेरणा की कमी अक्सर इसलिए होती है क्योंकि हम अपने ‘क्यों’ (Why) से संपर्क खो देते हैं। एक पल के लिए रुकें और सोचें:आपने यह ब्लॉग (या जो भी काम आप कर रहे हैं) क्यों शुरू किया था?आपका लक्ष्य क्या था?इसे पूरा करने से आपको कैसी खुशी मिलती है?अपने असली उद्देश्य को याद करने से प्रेरणा की एक छोटी सी चिंगारी फिर से जल सकती है।

    निष्कर्षप्रेरणा एक लहर की तरह है। जब यह आपके साथ हो तो इसका पूरा फायदा उठाएँ, और जब यह कम हो, तो याद रखें कि अनुशासन (discipline) और छोटी-छोटी आदतें ही आपको मंजिल तक ले जाएँगी।आज आप ऐसा कौन सा छोटा कदम उठाने जा रहे हैं?

    https://youtube.com/@prernapathofficial-x8j?si=r-HAxBPyYPGAypJg

  • असफलता नहीं, सीखने का अवसर: अपनी गलतियों से सीखें

    असफलता नहीं, सीखने का अवसर: अपनी गलतियों से सीखें

    सभी अपनी जिंदगी में गलतियाँ करते हैं। कभी-कभी हमें असफलता का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में, हम अक्सर निराश हो जाते हैं और हार मान लेते हैं। लेकिन क्या होगा अगर हम असफलता को एक अलग नज़रिए से देखें?असफलता कोई अंत नहीं है, बल्कि यह सीखने का एक मूल्यवान अवसर है। हर गलती हमें कुछ नया सिखाती है, हमें मजबूत बनाती है, और हमें यह दिखाती है कि हमें कहाँ सुधार करने की आवश्यकता है। दुनिया के सबसे सफल लोगों ने भी अनगिनत बार असफलताओं का सामना किया है, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और आगे बढ़ते रहे।अगली बार जब आप किसी चुनौती या असफलता का सामना करें, तो उसे एक रुकावट के रूप में न देखें। इसके बजाय, यह पूछें कि आप इस अनुभव से क्या सीख सकते हैं। अपनी गलतियों को स्वीकार करें, उनसे सीखें, और उन्हें अपनी सफलता की सीढ़ी बनाएं। याद रखें, गिरना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन गिरने के बाद उठने से इनकार करना बड़ी बात है।हार मत मानो, अपनी गलतियों से सीखो, और खुद को हर दिन बेहतर बनाते रहो!

  • Adhik vicharon se chhutkara

    Adhik vicharon se chhutkara

    सोच पर काबू

    क्या आप भी अक्सर बीती बातों को लेकर सोचते रहते हैं? क्या आपके दिमाग में “क्या होगा अगर… वाले सवाल चलते रहते हैं? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। आप “ओवरथिंकिंग” यानी ज़रूरत से ज़्यादा सोचने की आदत के शिकार हो सकते हैं।

    ​ओवरथिंकिंग एक ऐसी मानसिक आदत है जहाँ आपका दिमाग एक ही विचार या समस्या में अटक जाता है और आप उससे बाहर नहीं निकल पाते। यह आपको वर्तमान में जीने से रोकता है और आपकी मानसिक शांति को भंग कर देता है।Prernapathofficial.com” पर आज हम 5 ऐसे प्रैक्टिकल और असरदार तरीकों के बारे में जानेंगे, जो आपको इस ज़्यादा सोचने की आदत से बाहर निकलने में मदद करेंगे।

    ​1. खुद को जागरूक करें

    ​ओवरथिंकिंग को रोकने का पहला कदम यह पहचानना है कि आप यह कर रहे हैं। अक्सर हम सोचने में इतना खो जाते हैं कि हमें पता ही नहीं चलता कि हम एक ही बात को घंटों से दोहरा रहे हैं।

    • कैसे करें: जैसे ही आप खुद को फँसा हुआ महसूस करें, रुकें और खुद से कहें, “मैं अभी ओवरथिंकिंग कर रहा हूँ।” सिर्फ यह स्वीकार कर लेना ही आपको उस लूप से बाहर निकलने की शक्ति देता है। अपने विचारों को देखें, उन्हें जज न करें, बस उन्हें पहचानें।

    ​2. “5 मिनट का नियम” अपनाएँ

    ​जब कोई चिंता आपको परेशान करे, तो उसे दबाने की कोशिश न करें। इसके बजाय, खुद को 5 मिनट का समय दें।

    • कैसे करें: अपने फ़ोन पर 5 मिनट का टाइमर सेट करें। उन 5 मिनटों में, उस समस्या के बारे में जितना सोचना है, सोच लें। उसके हर पहलू पर विचार करें। लेकिन जैसे ही टाइमर बजे, आपको रुकना होगा। एक कागज़ लें और अपनी चिंता को लिख दें। यह आपके दिमाग को संकेत देता है कि इस पर बाद में सोचा जा सकता है, अभी के लिए इसे छोड़ दें।

    ​3. वर्तमान में लौटें

    ​ओवरथिंकिंग या तो अतीत (Past) में होती है (“मुझे वैसा नहीं करना चाहिए था”

    या भविष्में कल क्या होगा”)। इसका सबसे अच्छा इलाज है अपने दिमाग को खींचकर ‘अभी’ में ले आना।

    • कैसे करें:5-4-3-2-1 तकनीक का इस्तेमाल करें।
      • 5 ऐसी चीज़ें देखें जो आपके आस- पास हैं।
      • 4 ऐसी आवाज़ें सुनें।
      • 3 ऐसी चीज़ों को छुएँ (जैसे टेबल, कपड़ा, पेन)।
      • 2 ऐसी चीज़ें सूंघें (जैसे कॉफ़ी, साबुन)।
      • 1 ऐसी चीज़ का स्वाद लें (जैसे पानी)। यह एक्सरसाइज आपके दिमाग को तुरंत वर्तमान में ले आती है।

    ​4. एक्शन लें

    ​अक्सर हम इसलिए ज़्यादा सोचते हैं क्योंकि हम फँसा हुआ महसूस करते हैं और हमें लगता है कि हम कुछ कर नहीं सकते।

    • कैसे करें: अपनी समस्या को छोटे-छोटे कदमों में तोड़ दें। अगर आप किसी बड़े प्रोजेक्ट को लेकर चिंतित हैं, तो बस उसका पहला, सबसे छोटा कदम उठाएँ (जैसे, सिर्फ एक ईमेल लिखना)। एक्शन लेना (भले ही वह कितना छोटा हो) आपके दिमाग को चिंता मोड से समाधान मोड में ले आता है।

    ​5. अपनी चिंताओं को शेड्यूल करें

    ​यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन यह बहुत असरदार है। अगर आप अपने दिमाग को कहेंगे कि “कभी चिंता मत करो”, तो वह और ज़्यादा चिंता करेगा।

    • कैसे करें: दिन में कोई 15 मिनट का समय (जैसे शाम 5:00 से 5:15 तक) सिर्फ “चिंता करने के लिए” रख दें। जब दिन में आपको कोई चिंताजनक विचार आए, तो खुद से कहें, “मैं इस बारे में अभी नहीं, अपने ‘चिंता समय’ में सोचूँगा।” जब आप उस समय पर बैठेंगे, तो आप पाएँगे कि उनमें से ज़्यादातर चिंताएँ अब उतनी बड़ी नहीं लग रही हैं। (बस यह समय सोने से ठीक पहले न रखें)।

    ​निष्कर्ष

    ​ओवरथिंकिंग एक आदत है, और किसी भी आदत की तरह इसे बदला जा सकता है। यह एक रात में नहीं होगा, लेकिन लगातार अभ्यास से आप अपने विचारों पर काबू पा सकते हैं।

    ​याद रखें, आप अपने विचार नहीं हैं। आप वह हैं जो उन विचारों को देख रहा है। इन तरीकों को अपनाएँ और अपने दिमाग का कंट्रोल वापस अपने हाथ में लें।

    आप ओवरथिंकिंग से बचने के लिए कौन सा तरीका सबसे पहले आज़माने वाले हैं? हमें कमेंट्स में बताएँ!

  • कुऐ का मेढक और समुद्र की यात्रा

    एक समय की बात है, एक पुराने कुएँ में एक मेंढक रहता था। उसका नाम ‘कूपक’ था। कूपक ने कभी भी कुएँ से बाहर की दुनिया नहीं देखी थी। वह मानता था कि उसका कुआँ ही पूरी दुनिया है, और उससे बड़ा कुछ नहीं। वह अपने छोटे से कुएँ में कूदता, उछलता और स्वयं को सबसे महान समझता था।एक दिन, एक समुद्री मेंढक, जिसका नाम ‘जलधि’ था, भटकते हुए उस कुएँ के पास आ पहुँचा। वह प्यास बुझाने के लिए कुएँ में कूदा।कूपक ने जलधि को देखा और हैरानी से पूछा, “तुम कहाँ से आए हो? क्या तुम इस कुएँ से हो? मैंने तुम्हें पहले कभी नहीं देखा।”जलधि ने जवाब दिया, “नहीं, मैं यहाँ से नहीं हूँ। मैं तो बहुत दूर, विशाल समुद्र से आया हूँ।”कूपक हँसा, “समुद्र? यह क्या होता है? क्या यह मेरे इस कुएँ जितना बड़ा है?”जलधि ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारे कुएँ से हज़ार गुना नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों गुना बड़ा है समुद्र। यह इतना विशाल है कि तुम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। इसमें अनगिनत जीव रहते हैं, और इसका कोई किनारा नहीं दिखता।”कूपक को यह बात मज़ाक लगी। उसने कहा, “तुम झूठ बोल रहे हो! इस छोटे से कुएँ से बड़ा कुछ नहीं हो सकता। तुम मुझे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हो।”जलधि ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कूपक अपनी बात पर अड़ा रहा। वह अपने सीमित दायरे को ही पूरी दुनिया मानता था और किसी भी नई बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं था।हार मानकर, जलधि ने कूपक से कहा, “ठीक है, अगर तुम्हें विश्वास नहीं होता, तो मेरे साथ आओ। मैं तुम्हें समुद्र दिखाऊँगा।”शुरुआत में कूपक डर गया, लेकिन जलधि के लगातार आग्रह पर, उसने हिम्मत की और कुएँ से बाहर निकला। पहली बार उसने आसमान देखा, हरे-भरे पेड़ देखे, और एक खुली, विशाल दुनिया देखी। वह हैरान रह गया।फिर जलधि उसे समुद्र तट पर ले गया। जैसे ही कूपक ने विशाल, नीले समुद्र को देखा, उसकी आँखें खुली की खुली रह गईं। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसी जगह भी हो सकती है। वह तुरंत समझ गया कि उसकी दुनिया कितनी छोटी थी और उसने कितने बड़े भ्रम में जीवन बिताया था।

  • सुधार करना बंद न करें: 2 मिनट की ‘Kaizen’ तकनीक से रोज़ 1% बेहतर बनें

    सुधार करना बंद न करें: 2 मिनट की ‘Kaizen’ तकनीक से रोज़ 1% बेहतर बनें

    ​बड़े लक्ष्य अक्सर हमें डरा देते हैं और हम शुरुआत ही नहीं कर पाते। इसका समाधान है जापान की ‘Kaizen’ तकनीक, जिसका मतलब है – छोटे, लगातार सुधार।

    Kaizen का नियम: ‘एक मिनट का सिद्धांत’

    ​आप जिस भी अच्छी आदत को अपनाना चाहते हैं (जैसे पढ़ना, एक्सरसाइज), उसे हर दिन सिर्फ एक मिनट के लिए करें। एक मिनट इतना छोटा समय है कि आपका दिमाग बहाने नहीं बनाएगा और धीरे-धीरे आपकी आदत बन जाएगी।

    आज कैसे शुरू करें?

    1. एक आदत चुनें: (जैसे- किताब पढ़ना)।
    2. उसे छोटा करें: (सिर्फ एक पैराग्राफ पढूंगा)।
    3. तुरंत करें: बिना सोचे, बस एक मिनट के लिए कर डालें।

    निष्कर्ष: सफलता की यात्रा हज़ार मील की हो सकती है, लेकिन उसकी शुरुआत एक छोटे कदम से ही होती है।

    आज आपकी 1 मिनट की चुनौती क्या है? कमेंट में बताएं।

    ब्लॉग 2: (शॉर्ट वर्जन)

    हेडलाइन: मन की शांति के लिए 5 मिनट: 4 वैज्ञानिक तरीके जो तुरंत काम करते हैं

    ​क्या आपके मन में हर वक्त विचारों का तूफ़ान चलता रहता है? शांति पाने के लिए इन 4 वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं।

    1. “4-7-8” साँस की तकनीक:

    • ​4 सेकंड तक साँस अंदर लें।
    • ​7 सेकंड तक रोकें।
    • ​8 सेकंड तक धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। (इसे 3-4 बार दोहराएं, तनाव तुरंत कम होगा)।

    2. कृतज्ञता (Gratitude) का अभ्यास:

    सोने से पहले दिन की 3 ऐसी अच्छी चीज़ों को याद करें या लिखें जिनके लिए आप आभारी हैं। यह आपकी सोच को सकारात्मक बनाता है।

    3. एक काम पर फोकस:

    मल्टीटास्किंग से बचें। जब खाना खाएं, तो सिर्फ खाना खाएं। जब काम करें, तो सिर्फ काम करें। इससे आपका दिमाग शांत रहता है।

    4. ‘चिंता का समय’ (Worry Time):

    दिन में 10 मिनट सिर्फ चिंता करने के लिए रखें। अगर बाकी समय चिंता आए, तो खुद से कहें, “मैं इसके बारे में अपने ‘चिंता के समय’ में सोचूंगा।”

    निष्कर्ष: शांति कहीं बाहर नहीं, आपके अंदर है। बस उसे अभ्यास से खोजने की ज़रूरत है।

    आज आप कौन सा तरीका अपनाएंगे?

    ब्लॉग 3: (शॉर्ट वर्जन)

    हेडलाइन: सोच बदलो, ज़िंदगी बदलो: ‘Growth Mindset’ अपनाने के 3 आसान स्टेप्स

    ​आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपनी काबिलियत के बारे में क्या सोचते हैं। “Growth Mindset” का मतलब है यह मानना कि आप मेहनत से कुछ भी सीख सकते हैं।

    इसे अपनाने के 3 तरीके:

    1. अपनी भाषा में ‘अभी तक’ (Yet) शब्द जोड़ें:

    • ​”मुझे यह नहीं आता” कहने के बजाय कहें, “मुझे यह अभी तक नहीं आता।”
    • ​यह छोटा सा शब्द आपके दिमाग को बताता है कि सुधार संभव है।

    2. चुनौतियों को दोस्त बनाएं:

    मुश्किल कामों से भागें नहीं। हर चुनौती आपके दिमाग को तेज़ बनाने का एक मौका है। आराम के बजाय विकास चुनें।

    3. प्रक्रिया को सराहें, सिर्फ परिणाम को नहीं:

    सिर्फ जीतने पर ध्यान न दें। अपनी मेहनत, सीखने की कोशिश और प्रयासों के लिए खुद की पीठ थपथपाएं।

    निष्कर्ष: आपका दिमाग एक मांसपेशी की तरह है; जितना आप इसे इस्तेमाल करेंगे, यह उतना ही मजबूत होगा।

    आज आप किस चीज़ में ‘अभी तक’ शब्द का इस्तेमाल करेंगे? कमेंट्स में बताएं!

    https://youtube.com/@prernapathofficial-x8j?si=BWBasZN-vZqaiYnz