अक्सर हम जीवन में एक ही गलती बार-बार दोहराते हैं: हम लोगों से वह बात करते हैं जो हम चाहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सामने वाला आपकी बात क्यों सुनेगा?
मछली और स्ट्रॉबेरी का सिद्धांत
डेल कारनेगी की किताब “लोक व्यवहार” पढ़ते समय मुझे एक अद्भुत उदाहरण मिला। लेखक कहते हैं, “मुझे स्ट्रॉबेरी और हम कहाँ गलती करते हैं?क्रीम बहुत पसंद है, लेकिन मछली को कीड़े पसंद हैं। इसलिए जब मैं मछली पकड़ने जाता हूँ, तो मैं काँटे में स्ट्रॉबेरी नहीं लगाता, बल्कि कीड़ा लगाता हूँ।”
यह सुनने में बहुत साधारण लगता है, लेकिन यह मानवीय व्यवहार (Human Behavior) का सबसे बड़ा रहस्य है।
चाहे वह बिजनेस मीटिंग हो, ऑफिस का काम हो, या घर की कोई बात—हम हमेशा अपनी ‘स्ट्रॉबेरी’ (अपनी ज़रूरतें) सामने रखते हैं।
मुझे यह काम आज चाहिए।”
मेरा टारगेट पूरा नहीं हो रहा।””
मुझे आपकी मदद की ज़रूरत है।”
सामने वाले को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि aap क्या चाहते हैं।
उसे फर्क पड़ता है कि उसे क्या चाहिए।इच्छा जगाने की कला (Arousing an Eager Want)
अगर aap दुनिया के सबसे सफल लोगों की श्रेणी में आना चाहते हैं, तो आपको दूसरों के मन में उस काम को करने की ‘तड़प’ या ‘इच्छा’ पैदा करनी होगी।
नजरिया बदलें: अपनी बात शुरू करने से पहले खुद से पूछें— “सामने वाला यह काम क्यों करना चाहेगा?
“फायदा दिखाएं: अपनी ज़रूरत को उनके फायदे के रूप में पेश करें।
सच्ची सहानुभूति: उनके जूतों में पैर रखकर (उनके स्थान पर रहकर) परिस्थिति को देखें।
Rohit Kumar का ‘लाइफ-चेंजिंग’ निष्कर्ष:
दुनिया उन लोगों से भरी पड़ी है जो सिर्फ अपना स्वार्थ देखते हैं। ऐसे में जो व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के दूसरे के नजरिए को समझता है, उसके पास असीमित अवसर होते हैं। जैसा कि हेनरी फोर्ड ने कहा था: “सफलता का अगर कोई रहस्य है, तो वह है दूसरे व्यक्ति के नजरिए को समझने की क्षमता।”
आज का एक्शन स्टेप:आज जब भी aap किसी से कुछ मांगें या किसी को कोई सुझाव दें, तो अपनी पसंद (स्ट्रॉबेरी) का जिक्र न करें। सामने वाले की पसंद (कीड़ा/उसका फायदा) पर बात शुरू करें। देखिए कैसे लोग आपकी बात सुनने के लिए बेताब हो जाते हैं।लेखक: Rohit Kumar